शासकीय महाविद्यालय बरपाली में “भारतीय ज्ञान परम्परा” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. सी.पी. नंद के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में 7 मार्च 2026 को संपन्न हुआ। संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध विरासत को समकालीन संदर्भों में समझना तथा शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करना था।
कार्यक्रम के संयोजक श्री दिनेश कुमार चन्द्रा (सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग) तथा सह-संयोजक श्रीमती लक्ष्मी साहू (सहायक प्राध्यापक, गणित विभाग) रहीं। आयोजन की वित्तीय व्यवस्था श्री डी.डी. महंत (हिन्दी विभाग) द्वारा तथा तकनीकी सहयोग डॉ. आकाश वैष्णव (वाणिज्य विभाग) द्वारा प्रदान किया गया।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. एन.डी.आर. चन्द्रा (पूर्व कुलपति, बस्तर विश्वविद्यालय, जगदलपुर) तथा डॉ. एस.एल. निराला (शासकीय जे.पी. वर्मा स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय, बिलासपुर) ने भारतीय ज्ञान परम्परा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए। विशेष आमंत्रित वक्ता श्री चन्द्रशेखर देवांगन ने भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर डॉ. तारणीश गौतम (कुल सचिव, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर) एवं श्री शिरोमणि चन्द्रा (संचालक, चन्द्रा अकैडमी, बिलासपुर) ने भारतीय ज्ञान परम्परा की समकालीन प्रासंगिकता तथा शिक्षा में इसके समावेश की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में मार्गदर्शक मंडल के रूप में श्री मनोज झा, डॉ. डी.आर. लहरे, डॉ. राजेन्द्र सिंह एवं प्रो. बी.के. पटेल का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। संगोष्ठी में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित विभिन्न विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर महाविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विवेक मोहन अग्रवाल के शोधार्थी द्वारा प्रभावी शोध पत्र प्रस्तुति दी गई।
अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।